नौ ग्रहों की शक्तियां होंगी संतुलित, धारण करें ये एक खास रत्न! कब और कैसे धारण करें?
वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। कुंडली में ग्रहों की स्थिति हमारे स्वास्थ्य, करियर, धन, विवाह, मानसिक शांति और भाग्य को प्रभावित करती है। जब कोई ग्रह अशुभ हो या कमजोर अवस्था में हो, तो जीवन में बाधाएं, तनाव और असफलता का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में ज्योतिष शास्त्र में रत्न धारण को एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा खास रत्न भी है, जिसे धारण करने से नौ ग्रहों की शक्तियां संतुलित हो सकती हैं? ओमांश एस्ट्रोलॉजी आज नौ ग्रहों को संतुलित करने का खास रत्न कौन सा है इससे जुड़ी अहम जानकारी लेकर प्रस्तुत है! आइए विस्तार से जानते हैं।
नवग्रह और उनका प्रभाव
नवग्रहों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्रोत माना गया है। प्रत्येक ग्रह किसी न किसी तत्व और जीवन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
सूर्य – आत्मबल, नेतृत्व, मान-सम्मान
चंद्र – मन, भावनाएं, माता, मानसिक शांति
मंगल – साहस, ऊर्जा, भूमि, भाई
बुध – बुद्धि, वाणी, व्यापार
गुरु (बृहस्पति) – ज्ञान, धर्म, संतान, भाग्य
शुक्र – प्रेम, विवाह, सुख-सुविधाएं
शनि – कर्म, संघर्ष, न्याय
राहु – अचानक परिवर्तन, भ्रम
केतु – वैराग्य, आध्यात्मिकता
जब ये ग्रह असंतुलित हो जाते हैं, तो जीवन में समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
क्या सच में एक ही रत्न से संतुलन संभव है?
आमतौर पर ज्योतिष में हर ग्रह के लिए अलग-अलग रत्न बताए गए हैं, जैसे सूर्य के लिए माणिक्य, चंद्र के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा आदि।
लेकिन कुछ स्थितियों में एक ऐसा विशेष रत्न भी सुझाया जाता है, जो समग्र ग्रह शांति में सहायक माना जाता है।
वह खास रत्न कौन सा है?
👉 नवरत्न
नवरत्न कोई एक रत्न नहीं बल्कि नौ रत्नों का विशेष संयोजन होता है, जो एक ही अंगूठी या लॉकेट में जड़ा जाता है। इसमें सभी नवग्रहों के प्रतिनिधि रत्न शामिल होते हैं।
नवरत्न में शामिल रत्न:
1. माणिक्य (सूर्य)
2. मोती (चंद्र)
3. मूंगा (मंगल)
4. पन्ना (बुध)
5. पुखराज (गुरु)
6. हीरा/ओपल (शुक्र)
7. नीलम (शनि)
8. गोमेद (राहु)
9. लहसुनिया (केतु)

नवरत्न धारण करने के लाभ
नवरत्न को राजयोग कारक रत्न भी कहा जाता है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
1. ग्रह दोषों से राहत
यदि कुंडली में एक से अधिक ग्रह अशुभ हों या ग्रहों की स्थिति स्पष्ट न हो, तो नवरत्न संतुलन बनाता है।
2. मानसिक शांति और आत्मविश्वास
नवरत्न मन को स्थिर करता है, नकारात्मक विचारों को कम करता है और आत्मबल बढ़ाता है।
3. करियर और व्यवसाय में उन्नति
यह रत्न निर्णय क्षमता को मजबूत करता है और कार्यक्षेत्र में सफलता दिलाने में सहायक माना जाता है।
4. धन और समृद्धि
नवरत्न आर्थिक अस्थिरता को कम करता है और धीरे-धीरे धन आगमन के योग बनाता है।
5. स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
नवग्रह संतुलन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार देखा जाता है।
किन लोगों के लिए नवरत्न विशेष लाभकारी है?
जिनकी कुंडली उपलब्ध नहीं है जो बार-बार असफलता या रुकावटों का सामना कर रहे हैं! जिन पर साढ़ेसाती, ढैय्या या ग्रह दशा का प्रभाव चल रहा हो! जिनका कार्य क्षेत्र सार्वजनिक या प्रशासनिक हो!
नवरत्न कैसे और कब धारण करें?
धातुओं में सोना या पंचधातु सर्वोत्तम मानी जाती है
*दिन और समय:
रविवार या गुरुवार
प्रातः सूर्य उदय के बाद
*मंत्र
धारण करते समय निम्न मंत्र का जाप करें:
“ॐ नवग्रहाय नमः” (108 बार)
*सावधानियां (बहुत जरूरी)
नवरत्न हमेशा प्राकृतिक और प्रमाणित होना चाहिए
नकली या सिंथेटिक रत्न नुकसान भी पहुंचा सकते हैं
अत्यधिक संवेदनशील कुंडली में पहले ज्योतिषीय परामर्श लें! टूटे या खंडित रत्न न पहनें!
क्या नवरत्न सभी को पहनना चाहिए?
हालांकि नवरत्न एक सुरक्षित रत्न माना जाता है, फिर भी यदि कुंडली में कोई ग्रह अत्यधिक प्रतिकूल हो, तो व्यक्तिगत रत्न अधिक प्रभावी हो सकता है।इसलिए व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण के बाद निर्णय लेना सबसे उत्तम रहता है।
*आध्यात्मिक दृष्टि से नवरत्न का महत्व:
प्राचीन ग्रंथों में नवरत्न को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संतुलनकर्ता कहा गया है। यह शरीर के नौ प्रमुख ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है।
इसी कारण राजा-महाराजा और साधु-संत भी नवरत्न धारण करते थे।
नवग्रहों की असंतुलित ऊर्जा जीवन में अनेक समस्याएं उत्पन्न कर सकती है। ऐसे में नवरत्न एक ऐसा खास रत्न है, जो सभी ग्रहों की शक्तियों को संतुलित कर जीवन में स्थिरता, सफलता और शांति लाने में सहायक हो सकता है।
हालांकि रत्न कोई चमत्कार नहीं, बल्कि कर्म
और प्रयास के साथ कार्य करने वाला सहायक उपाय है।
यदि सही विधि और श्रद्धा के साथ नवरत्न धारण किया जाए, तो इसके सकारात्मक परिणाम अवश्य देखने को मिलते हैं।













